सार्वजनिक सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थानों पर बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों को देखते हुए सार्वजनिक सुरक्षा और जनस्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
अदालत ने कहा कि यह केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि मानव सुरक्षा का संवैधानिक मुद्दा है — क्योंकि अनुच्छेद 21 प्रत्येक व्यक्ति को जीवन और सुरक्षा का अधिकार (Right to Life) प्रदान करता है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य निर्देश
- सभी शैक्षणिक संस्थान, अस्पताल और परिवहन केंद्र एक नोडल अधिकारी नियुक्त करेंगे जो परिसर की सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित करेगा।
- प्रत्येक जिले के जिला मजिस्ट्रेट यह सुनिश्चित करेंगे कि इन स्थानों पर सीमाबंदी, गेट और फेंसिंग उचित रूप से की गई हो।
- नगरपालिकाएँ और पंचायतें हर तीन माह में निरीक्षण करेंगी ताकि आवारा कुत्तों की गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके।
- सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को एंटी-रेबीज़ वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना होगा।
Static GK Fact: भारत का सुप्रीम कोर्ट 28 जनवरी 1950 को स्थापित हुआ था, संविधान लागू होने के दो दिन बाद।
कचरा प्रबंधन और पशु नियंत्रण
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कचरे के अनुचित निपटान के कारण ही कुत्तों की बड़ी संख्या में उपस्थिति देखी जाती है।
अदालत ने निर्देश दिया कि:
- प्रभावी अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाए।
- कचरा स्थलों की निगरानी और नियमित सफाई अभियान चलाए जाएँ।
इससे कुत्तों के झुंडों का बनना और भोजन के स्रोतों की उपलब्धता को रोका जा सकेगा।
भारत में आवारा कुत्तों की स्थिति
2019 पशुधन गणना (Livestock Census) के अनुसार भारत में लगभग 1.5 करोड़ आवारा कुत्ते हैं।
राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) के अनुसार 2024 में 37 लाख डॉग बाइट मामले दर्ज किए गए।
भारत वैश्विक रेबीज़ मौतों का 36% हिस्सा रखता है — जिनमें से 96% मामले कुत्तों के काटने से संबंधित हैं।
Static GK Tip: रेबीज़ (Rabies) एक Lyssavirus से होने वाला संक्रमण है जो क्लिनिकल लक्षण प्रकट होने के बाद लगभग 100% घातक होता है।
संवैधानिक और कानूनी ढांचा
- अनुच्छेद 243(W) के तहत नगरपालिकाएँ सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता के लिए जिम्मेदार हैं, जिसमें आवारा पशु नियंत्रण शामिल है।
- वहीं अनुच्छेद 51A(g) नागरिकों को “जीवों के प्रति करुणा रखने” का दायित्व देता है, जिससे मानव सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन कायम किया जा सके।
एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियम 2023, जो प्रिवेंशन ऑफ क्रुएल्टी टू एनिमल्स एक्ट 1960 के तहत बनाए गए हैं, “कैप्चर–स्टेरिलाइज़–वैक्सीनेट–रिलीज़ (CSVR)” मॉडल अपनाते हैं ताकि कुत्तों की आबादी का नैतिक प्रबंधन किया जा सके।
सरकारी पहल और राष्ट्रीय लक्ष्य
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कुत्तों से फैलने वाले रेबीज़ के उन्मूलन हेतु राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPRE) शुरू की है, जिसका लक्ष्य 2030 तक भारत को रेबीज़ मुक्त बनाना है।
इस योजना में शामिल हैं:
- कुत्तों का सामूहिक टीकाकरण
- जनजागरूकता अभियान
- स्वास्थ्य, शहरी और पशु कल्याण विभागों के बीच समन्वय
Static GK Fact: भारत का 2030 तक रेबीज़ उन्मूलन लक्ष्य WHO, FAO, WOAH, और GARC द्वारा तैयार वैश्विक रणनीतिक योजना के अनुरूप है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय (Topic) | विवरण (Detail) |
| सुप्रीम कोर्ट निर्देश | सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश |
| संवैधानिक आधार | अनुच्छेद 21 – जीवन और सुरक्षा का अधिकार |
| आवारा कुत्तों की संख्या | 1.5 करोड़ (2019 पशुधन गणना) |
| कुत्तों के काटने की घटनाएँ (2024) | लगभग 37 लाख (NCDC डेटा) |
| वैश्विक रेबीज़ मौतों में भारत का हिस्सा | 36% |
| प्रमुख कानूनी ढाँचा | एनिमल बर्थ कंट्रोल नियम, 2023 |
| कार्यान्वयन मॉडल | कैप्चर–स्टेरिलाइज़–वैक्सीनेट–रिलीज़ (CSVR) |
| संबंधित मंत्रालय | स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय |
| राष्ट्रीय पहल | NAPRE – 2030 तक रेबीज़ उन्मूलन लक्ष्य |
| सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय | अस्पतालों में एंटी-रेबीज़ वैक्सीन का अनिवार्य स्टॉक |





