राज्यपाल का हालिया निर्णय
राज्यपाल आर.एन. रवि ने हाल ही में तमिलनाडु विधान सभा के शीतकालीन सत्र में पारित 18 विधेयकों में से 9 विधेयकों को अपनी स्वीकृति प्रदान की है।
यह निर्णय केंद्र–राज्य संबंधों में चल रहे तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
स्वीकृत विधेयकों में प्रमुख है —
“तमिलनाडु वित्तीय दायित्व (संशोधन) विधेयक, 2024”, जिसे पहले राज्यपाल ने फरवरी 2024 में वापस भेजा था।
विधान सभा ने इसे पुनः पारित किया, जिसके बाद अब इसे राज्यपाल की स्वीकृति मिल गई।
स्थैतिक जीके तथ्य: तमिलनाडु विधान सभा में 234 सदस्य होते हैं और यह संविधान के अनुच्छेद 168 के अंतर्गत राज्य की नीति-निर्माण प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
संवैधानिक दायित्वों का पालन
राज्यपाल द्वारा दी गई स्वीकृति संवैधानिक अनुपालन की दिशा में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है, विशेषकर तब जब सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में कहा था कि
“राज्यपाल विधेयकों को अनिश्चित काल तक लंबित या रोके नहीं रख सकते।”
न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की थी कि इस प्रकार की देरी उत्तरदायी शासन और निर्वाचित विधान सभाओं की सर्वोच्चता को कमजोर करती है।
यह पहली बार है जब राज्यपाल ने किसी ऐसे विधेयक को स्वीकृति दी है जिसे उन्होंने पहले लौटा दिया था, जो राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच सहयोग की नई शुरुआत का संकेत देता है।
स्थैतिक जीके टिप: अनुच्छेद 200 राज्यपाल को यह अधिकार देता है कि वह किसी विधेयक को स्वीकृति दे, अस्वीकार करे या (मनी बिल को छोड़कर) पुनर्विचार हेतु विधानसभा को लौटा सके।
लंबित और वापस लिए गए विधेयक
31 अक्तूबर 2025 तक 8 विधेयक अभी भी राज्यपाल कार्यालय में लंबित हैं, जिनमें प्रमुख है —
तमिलनाडु सिद्धा मेडिकल यूनिवर्सिटी विधेयक, 2025, जिसे मूल रूप से 2022 में पारित किया गया था और संशोधन सुझावों के साथ लौटाया गया था।
वहीं, तमिलनाडु निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2025 को राज्य सरकार ने स्वयं वापस ले लिया, क्योंकि इस पर विधायकों और शिक्षा विशेषज्ञों द्वारा आलोचना की गई थी।
यह कदम सरकार की उत्तरदायी और सहभागी नीति-निर्माण प्रक्रिया को दर्शाता है।
स्थैतिक जीके तथ्य: सिद्धा चिकित्सा प्रणाली, जो आयुष मंत्रालय के अंतर्गत मान्यता प्राप्त है, तमिलनाडु की प्राचीन पारंपरिक औषधीय पद्धति का हिस्सा है।
स्वीकृत विधेयकों की सूची
राज्यपाल द्वारा स्वीकृत प्रमुख नौ विधेयक इस प्रकार हैं:
• तमिलनाडु वेतन भुगतान (संशोधन) विधेयक
• तमिलनाडु निरसन विधेयक
• तमिलनाडु निरसन (द्वितीय) विधेयक
• तमिलनाडु राजमार्ग (संशोधन) विधेयक
• तमिलनाडु समुद्री बोर्ड (संशोधन) विधेयक
• तमिलनाडु विद्युत उपभोग या बिक्री पर कर (संशोधन) विधेयक
• तमिलनाडु निजी महाविद्यालय (विनियमन) संशोधन विधेयक
• तमिलनाडु विनियोग (सं. 6) विधेयक
• तमिलनाडु वित्तीय दायित्व (संशोधन) विधेयक, 2024
ये विधेयक प्रशासन, अवसंरचना, वित्त और शिक्षा जैसे क्षेत्रों से संबंधित हैं, जो राज्य की व्यापक विधायी गतिविधियों को दर्शाते हैं।
तमिलनाडु के लिए महत्व
यह घटनाक्रम राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच संबंधों में नई दिशा का संकेत देता है।
साथ ही यह विधेयक अनुमोदन प्रक्रिया में समयबद्धता और पारदर्शिता की आवश्यकता को भी रेखांकित करता है।
न्यायपालिका की भूमिका ने यह सुनिश्चित किया है कि संवैधानिक पदों के बीच शक्ति-संतुलन कायम रहे।
स्थैतिक जीके टिप: राज्यपाल राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है और उसकी नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 155 के अंतर्गत की जाती है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| राज्यपाल | आर.एन. रवि |
| शीतकालीन सत्र में पारित कुल विधेयक | 18 |
| स्वीकृत विधेयक | 9 |
| पुनः स्वीकृत विधेयक | तमिलनाडु वित्तीय दायित्व (संशोधन) विधेयक, 2024 |
| लंबित विधेयक | 8 |
| वापस लिया गया विधेयक | तमिलनाडु निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2025 |
| स्वीकृति से संबंधित अनुच्छेद | अनुच्छेद 200 |
| सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी | राज्यपाल विधेयकों को अनिश्चित काल तक रोके नहीं रख सकते |
| पहली बार उठाया गया कदम | राज्यपाल ने लौटाया गया विधेयक पुनः स्वीकृत किया |
| विधायी संस्था | तमिलनाडु विधान सभा |





