भारत के कृषि दूरदर्शी को नई श्रद्धांजलि
‘The Man Who Fed India’ शीर्षक से नई जीवनी, जिसे प्रियम्बदा जयकुमार ने लिखा है, चेन्नई में प्रकाशित की गई।
यह पुस्तक भारत के महान कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के अद्भुत जीवन को समर्पित है — जिन्होंने भारत को भूखमरी से आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर किया।
जीवनी उनके तमिलनाडु में साधारण प्रारंभ से लेकर वैश्विक कृषि परिवर्तन के प्रतीक बनने तक की यात्रा का विस्तार से वर्णन करती है।
हरित क्रांति में डॉ. स्वामीनाथन की भूमिका
डॉ. मोंकोम्बु संबासिवन स्वामीनाथन, जिन्हें “भारतीय हरित क्रांति के जनक” के रूप में जाना जाता है, ने 1960 के दशक में भारत को खाद्यान्न संकट से बाहर निकालने में केंद्रीय भूमिका निभाई।
उन्होंने नॉर्मन ई. बोरलॉग के साथ मिलकर उच्च उपज वाली गेहूं और धान की किस्में (HYVs) विकसित कीं, जिससे उत्पादन में क्रांतिकारी वृद्धि हुई।
स्थैतिक जीके तथ्य: भारत में हरित क्रांति की शुरुआत 1965 में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और कृषि मंत्री सी. सुब्रमणियम के नेतृत्व में हुई, जबकि वैज्ञानिक मोर्चे पर डॉ. स्वामीनाथन ने नेतृत्व संभाला।
जीवनी का मुख्य फोकस
यह जीवनी डॉ. स्वामीनाथन की वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ-साथ उनके किसानों के कल्याण, सतत कृषि और खाद्य सुरक्षा के प्रति आजीवन समर्पण पर भी केंद्रित है।
लेखिका प्रियम्बदा जयकुमार ने बताया है कि डॉ. स्वामीनाथन ने पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान के समन्वय से ग्रामीण भारत में समान और टिकाऊ विकास का मार्ग दिखाया।
स्थैतिक जीके टिप: डॉ. स्वामीनाथन ने 1988 में एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (MSSRF) की स्थापना की, जिसका मुख्यालय चेन्नई में है। यह संस्था सतत ग्रामीण विकास और जैव विविधता संरक्षण पर केंद्रित है।
वैश्विक प्रभाव और सम्मान
अपने जीवनकाल में डॉ. स्वामीनाथन ने अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किए —
पद्मश्री (1967), पद्मभूषण (1972) और पद्मविभूषण (1989)।
उन्होंने भारत के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और UNEP के साथ भी कार्य किया, जहाँ उन्होंने सतत कृषि नीति को आकार दिया।
स्थैतिक जीके तथ्य: डॉ. स्वामीनाथन 2007 से 2013 तक राज्यसभा सदस्य रहे और उन्होंने किसान अधिकार विधेयक तथा खाद्य सुरक्षा अधिनियम पर महत्वपूर्ण योगदान दिया।
उनकी अमर विरासत
डॉ. स्वामीनाथन के निधन (सितम्बर 2023) के बाद चेन्नई में इस जीवनी का विमोचन उनके योगदान के प्रति एक भावनात्मक श्रद्धांजलि है।
उनका प्रसिद्ध कथन —
“If agriculture goes wrong, nothing else will have a chance to go right.”
आज भी नीति-निर्माताओं और पर्यावरणविदों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
यह पुस्तक इस बात की याद दिलाती है कि दृष्टि, विज्ञान और करुणा का संगम एक राष्ट्र की नियति को बदल सकता है।
डॉ. स्वामीनाथन ने सुनिश्चित किया कि भारत की भूमि पर आशा के बीज कभी सूखें नहीं।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| पुस्तक का शीर्षक | The Man Who Fed India |
| लेखिका | प्रियम्बदा जयकुमार |
| विषय | डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन की जीवनी |
| विमोचन स्थल | चेन्नई, तमिलनाडु |
| प्रमुख योगदान | भारत की हरित क्रांति में नेतृत्व |
| स्थापित फाउंडेशन | एम.एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन (1988) |
| प्रमुख पुरस्कार | पद्मश्री, पद्मभूषण, पद्मविभूषण |
| सहयोग | नॉर्मन ई. बोरलॉग के साथ हरित क्रांति में |
| संसदीय भूमिका | राज्यसभा सदस्य (2007–2013) |
| विरासत उद्धरण | “If agriculture goes wrong, nothing else will have a chance to go right.” |





