गूगल का अंतरिक्ष आधारित एआई की ओर साहसिक कदम
गूगल ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को पृथ्वी से परे ले जाने की दिशा में एक अभिनव पहल की है — “प्रोजेक्ट सनकैचर”।
इस परियोजना का उद्देश्य सौर ऊर्जा से संचालित उपग्रहों के माध्यम से यह अध्ययन करना है कि अंतरिक्ष में एआई कंप्यूटिंग कैसे कार्य कर सकती है।
यह पहल प्रौद्योगिकी, स्थायित्व और अंतरिक्ष अनुसंधान के बढ़ते संगम का प्रतीक है।
स्थैतिक जीके तथ्य: गूगल की स्थापना 1998 में लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन द्वारा की गई थी, और इसका मुख्यालय माउंटेन व्यू, कैलिफोर्निया में स्थित है।
प्रोजेक्ट सनकैचर की दृष्टि
इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य ऐसे एआई-संचालित उपग्रहों का निर्माण और प्रक्षेपण करना है जो पृथ्वी की परिक्रमा करते हुए विशाल डेटा का कुशल विश्लेषण कर सकें।
ये उपग्रह लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में संचालित होंगे — यह क्षेत्र पृथ्वी से लगभग 500 से 2,000 किलोमीटर ऊँचाई पर स्थित होता है और अधिकांश आधुनिक संचार उपग्रह इसी कक्षा में काम करते हैं।
परियोजना के तहत छोटे आकार के उपग्रहों का एक समूह (constellation) विकसित किया जाएगा, जिनमें गूगल के टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट (TPU) लगे होंगे — ये विशेष चिप्स मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग को गति देने के लिए बनाए गए हैं।
स्थैतिक जीके टिप: लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) में ही अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) भी स्थित है, जो पृथ्वी की परिक्रमा लगभग 408 किमी ऊँचाई पर करता है।
सौर ऊर्जा से संचालित कृत्रिम बुद्धिमत्ता
प्रोजेक्ट सनकैचर की सबसे उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसके उपग्रह पूरी तरह सौर ऊर्जा से संचालित होंगे।
हर उपग्रह पर लगे सोलर पैनल एआई कंप्यूटेशन के लिए आवश्यक ऊर्जा उत्पन्न करेंगे, जिससे पृथ्वी आधारित डेटा सेंटरों की ऊर्जा खपत में कमी आएगी।
यह मॉडल सतत विकास और ऊर्जा दक्षता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
स्थैतिक जीके तथ्य: सौर ऊर्जा से संचालित पहला उपग्रह “वैनगार्ड-1” था, जिसे 1958 में अमेरिका ने प्रक्षेपित किया था।
प्रोटोटाइप और परीक्षण योजना
गूगल 2027 तक दो प्रोटोटाइप उपग्रह लॉन्च करने की योजना बना रहा है।
इनका उद्देश्य तीन मुख्य पहलुओं का परीक्षण करना है —
- सौर ऊर्जा उत्पादन की दक्षता
- अंतरिक्ष में चिप का प्रदर्शन
- डेटा ट्रांसमिशन की विश्वसनीयता
यदि ये परीक्षण सफल रहते हैं, तो यह परियोजना एक अंतरिक्ष-आधारित एआई कंप्यूटिंग नेटवर्क के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करेगी, जो पृथ्वी और उपग्रह प्रणालियों के बीच रीयल-टाइम विश्लेषण और संचार को सक्षम बनाएगा।
यह पहल आपदा प्रबंधन, अंतरिक्ष अनुसंधान, और वैश्विक संचार में भी सुधार ला सकती है।
स्थैतिक जीके टिप: पहला कृत्रिम उपग्रह “स्पुतनिक-1” था, जिसे 1957 में सोवियत संघ ने प्रक्षेपित किया — जिससे अंतरिक्ष युग की शुरुआत हुई।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि प्रोजेक्ट सनकैचर सफल होता है, तो यह एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग की संरचना को पुनर्परिभाषित कर सकता है।
यह पहल अन्य प्रौद्योगिकी कंपनियों को भी स्पेस-आधारित डेटा समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित कर सकती है, जिससे ऊर्जा दक्षता और डेटा विलंबता (latency) की समस्याएँ कम होंगी।
यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि आने वाले वर्षों में “कक्षा में एआई” (AI in Orbit) एक सामान्य वास्तविकता बन सकता है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| परियोजना का नाम | प्रोजेक्ट सनकैचर |
| प्रारंभकर्ता | गूगल |
| उद्देश्य | सौर ऊर्जा संचालित उपग्रहों के माध्यम से अंतरिक्ष में एआई डेटा सेंटरों का परीक्षण |
| कक्षा का प्रकार | निम्न-पृथ्वी कक्षा (Low-Earth Orbit – LEO) |
| प्रमुख तकनीक | टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट्स (TPUs) |
| प्रोटोटाइप लॉन्च वर्ष | 2027 |
| ऊर्जा स्रोत | सौर ऊर्जा |
| प्रोटोटाइप उपग्रहों की संख्या | 2 |
| गूगल मुख्यालय | माउंटेन व्यू, कैलिफोर्निया |
| महत्व | सतत अंतरिक्ष-आधारित एआई कंप्यूटिंग की दिशा में पहला कदम |





