भारत के पहले डिजिटल संग्रहालय का उद्घाटन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर (अटल नगर) में भारत का पहला पूर्णतः डिजिटल संग्रहालय — जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित संग्रहालय — का उद्घाटन किया।
यह संग्रहालय उन जनजातीय वीरों की वीरता, संघर्ष और बलिदान को समर्पित है जिन्होंने ब्रिटिश उपनिवेशवाद के खिलाफ विद्रोह किया था।
स्थैतिक जीके तथ्य: इस संग्रहालय का आधिकारिक नाम “शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय” है। यह भारत का पहला डिजिटल सांस्कृतिक केंद्र है, जो जनजातीय इतिहास को सम्मानित करने के लिए निर्मित किया गया है।
तकनीक और अनुभव का संगम
संग्रहालय में VFX डिस्प्ले, डिजिटल प्रोजेक्शन और इंटरएक्टिव टचस्क्रीन का उपयोग किया गया है ताकि आगंतुक जनजातीय विद्रोहों की कहानियों को अनुभव कर सकें।
QR कोड आधारित कहानियाँ दर्शकों को एक आभासी यात्रा पर ले जाती हैं जहाँ परंपरा और तकनीक का संगम दिखता है।
यह डिजिटल मॉडल स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को वास्तविक समय में जोड़ता है, जिससे भारत की ऐतिहासिक स्मृतियाँ संरक्षित और सुलभ बनती हैं। यह पहल परंपरा और तकनीक के समन्वय से इतिहास को भविष्य से जोड़ने की दिशा में भारत की दृष्टि को दर्शाती है।
शहीद वीर नारायण सिंह को श्रद्धांजलि
संग्रहालय का मुख्य आकर्षण शहीद वीर नारायण सिंह (1820–1857) को समर्पित है — वे सोनाखान के जमींदार और छत्तीसगढ़ के पहले शहीद थे।
1856–57 के अकाल के दौरान उन्होंने ब्रिटिशों द्वारा अनाज के जमाखोरी का विरोध किया और गरीब ग्रामीणों में भोजन वितरित किया।
उनके नेतृत्व ने किसानों और आदिवासियों को औपनिवेशिक शोषण के खिलाफ संगठित किया।
1857 में उन्हें पकड़ लिया गया और फाँसी दे दी गई, लेकिन उनका संघर्ष आज भी जनजातीय गर्व और आत्मसम्मान का प्रतीक है।
स्थैतिक जीके टिप: रायपुर का वीर नारायण सिंह स्टेडियम उन्हीं के नाम पर रखा गया है, जो भारत की स्वतंत्रता के लिए उनके योगदान का सम्मान करता है।
प्रमुख जनजातीय विद्रोहों का प्रदर्शन
संग्रहालय में भारत के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर मध्य और पूर्वी क्षेत्रों के महत्वपूर्ण जनजातीय आंदोलनों को दर्शाया गया है:
• हल्बा विद्रोह: ब्रिटिश शासन के विरुद्ध छत्तीसगढ़ का जनजातीय आंदोलन।
• पारलकोट विद्रोह: औपनिवेशिक शोषण के विरुद्ध किसानों और जनजातियों का संघर्ष।
• सरगुजा विद्रोह: सरगुजा क्षेत्र के जनजातीय नेताओं द्वारा किया गया स्थानीय विद्रोह।
• भुमकाल आंदोलन: अन्यायपूर्ण भूमि और कर नीतियों के विरुद्ध विरोध।
• तारापुर और लिंगगिरी विद्रोह: जमीनी स्तर पर ब्रिटिश विरोधी आंदोलन।
• रानी चौरिस संघर्ष: महिलाओं द्वारा संचालित औपनिवेशिक विरोध आंदोलन।
• झंडा और जंगल सत्याग्रह: अहिंसात्मक जनजातीय प्रतिरोध के प्रतीक।
ये सभी आंदोलन भारत की स्वतंत्रता के व्यापक संघर्ष में जनजातीय समाज के योगदान को प्रदर्शित करते हैं।
डिजिटल संग्रहालय का महत्व
यह संग्रहालय भारत की डिजिटल विरासत संरक्षण दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
यह न केवल जनजातीय नायकों की गाथाओं को संरक्षित करता है बल्कि इंटरएक्टिव माध्यमों से नई पीढ़ी तक पहुँचाता है।
यह परियोजना नवा रायपुर में सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा देती है और जनजातीय पहचान के प्रति जनजागरूकता फैलाती है।
तकनीक और इतिहास के समन्वय से यह सुनिश्चित करता है कि इन अज्ञात वीरों की गाथाएँ आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहें।
स्थैतिक जीके तथ्य: यह संग्रहालय “आज़ादी का अमृत महोत्सव” पहल का हिस्सा है, जो भारत की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में ऐतिहासिक स्मरण और सांस्कृतिक नवाचार का प्रतीक है।
Static Usthadian Current Affairs Table
| विषय | विवरण |
| स्थान | नवा रायपुर, अटल नगर, छत्तीसगढ़ |
| संग्रहालय का नाम | शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक एवं जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय |
| उद्घाटनकर्ता | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी |
| उद्घाटन वर्ष | 2025 |
| समर्पण | भारत के जनजातीय स्वतंत्रता सेनानियों को |
| प्रयुक्त तकनीक | VFX, डिजिटल प्रोजेक्शन, इंटरएक्टिव QR कोड |
| मुख्य नायक | शहीद वीर नारायण सिंह (1820–1857) |
| प्रदर्शित आंदोलन | हल्बा विद्रोह, भुमकाल आंदोलन, पारलकोट विद्रोह, रानी चौरिस संघर्ष |
| महत्व | भारत का पहला पूर्णतः डिजिटल जनजातीय संग्रहालय |
| उद्देश्य | भारत के स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय योगदान को संरक्षित और प्रोत्साहित करना |





