कर्नाटिक परंपरा की उत्कृष्टता का उत्सव
चेन्नई के म्यूज़िक एकेडमी, जो 1928 में स्थापित हुआ था, ने 2024 में कर्नाटिक संगीत के प्रमुख कलाकारों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं को सम्मानित किया है। ये पुरस्कार केवल प्रस्तुति करने वालों को नहीं, बल्कि उन लोगों को भी मान्यता देते हैं जो शास्त्रीय संगीत परंपरा को संरक्षित रखते हैं—जैसे शिक्षक, संगीतशास्त्री और संगतकार।
टी.एम. कृष्णा: परिवर्तन की आवाज़ और संगीत कौशल
टी.एम. कृष्णा को वर्ष 2024 के लिए संगीत कलानिधि पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो कर्नाटिक संगीत का सर्वोच्च सम्मान है (1942 में स्थापित)। कृष्णा अपनी अद्वितीय गायकी और सामाजिक समावेशन की वकालत के लिए प्रसिद्ध हैं। उन्होंने पारंपरिक सभाओं से बाहर निकलकर मछुआरों की बस्तियों और सार्वजनिक स्थानों पर प्रस्तुति देकर संगीत को अधिक लोकतांत्रिक बना दिया है।
गुरुओं का सम्मान: संगीत कलााचार्य पुरस्कार
2024 का संगीत कलााचार्य सम्मान निम्नलिखित गुरुओं को प्रदान किया गया:
- परस्साला रवि: केरल के वरिष्ठ गायक, जिन्होंने युवा प्रतिभाओं को संवारने में जीवन समर्पित किया
- गीता राजा: संगीत शिक्षण में समर्पित एक सम्मानित गायिका और गुरु
ये सम्मान इस बात का प्रमाण हैं कि कर्नाटिक संगीत अधिकतर गुरुओं से ही आगे बढ़ता है, न कि केवल पुस्तकों या मंचों से।
डॉ. मार्गरेट बास्टिन: संगीतशास्त्र की विदुषी
2024 का म्यूज़िकोलॉजिस्ट अवार्ड डॉ. मार्गरेट बास्टिन को प्रदान किया गया। उनकी शोध आधारित लेखनी और ऐतिहासिक समझ ने कर्नाटिक संगीत के सिद्धांत और संरचना को समृद्ध किया है। मंच पर वे भले न दिखें, लेकिन परंपरा के दस्तावेज़ीकरण और संरक्षण में इनका योगदान अतुलनीय है।
टीटीके पुरस्कार: संगतकारों की पहचान
टीटीके पुरस्कार, जो टी.टी. कृष्णमाचारी के नाम पर हैं, निम्नलिखित को प्रदान किए गए:
- तिरुवैयारु ब्रदर्स – एस. नारसिम्हन और एस. वेंकटेशन, उनके युगल योगदान के लिए
- एच.के. नारसिम्हमूर्ति – एक प्रतिष्ठित वायलिन संगतकार, जिन्होंने कई अग्रणी कलाकारों को मंच पर सहयोग दिया
ये पुरस्कार उन कलाकारों का सम्मान हैं जो मुख्य कलाकारों को संगीत, लय और प्रस्तुति में मजबूत आधार प्रदान करते हैं।
आज के दौर में इन पुरस्कारों का महत्व
म्यूज़िक एकेडमी जैसे संस्थान केवल सम्मान नहीं देते, बल्कि भारत की सांस्कृतिक परंपरा की दिशा तय करते हैं। टी.एम. कृष्णा जैसे परंपरा को चुनौती देने वाले और उत्कृष्टता के प्रतीक कलाकारों का सम्मान कला में बढ़ती समावेशिता का संकेत है।
शोधकर्ताओं और शिक्षकों को पहचान देने से यह भी स्पष्ट होता है कि संगीत केवल प्रस्तुत नहीं किया जाता, बल्कि उसे पढ़ाया, संरक्षित और समझा भी जाता है। यह कला की गहराई और निरंतरता की रक्षा करने का काम करता है।
STATIC GK SNAPSHOT (प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए)
प्रमुख तथ्य | विवरण |
संगीत कलानिधि 2024 | टी.एम. कृष्णा |
संगीत कलााचार्य सम्मान | परस्साला रवि और गीता राजा |
म्यूज़िकोलॉजिस्ट अवार्ड 2024 | डॉ. मार्गरेट बास्टिन |
टीटीके पुरस्कार विजेता | तिरुवैयारु ब्रदर्स (एस. नारसिम्हन और एस. वेंकटेशन), एच.के. नारसिम्हमूर्ति |
म्यूज़िक एकेडमी की स्थापना | 1928, चेन्नई |
संगीत कलानिधि पुरस्कार की स्थापना | 1942 |
टीटीके पुरस्कार नामित | टी.टी. कृष्णमाचारी |
परीक्षा प्रासंगिकता | TNPSC, UPSC, SSC, बैंकिंग, कला एवं संस्कृति |