स्वच्छ भारत की नई तस्वीर
स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 के साथ भारत ने शहरी स्वच्छता की दिशा में एक और मजबूत कदम बढ़ाया है। आवास और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा 2016 में शुरू किया गया यह वार्षिक सर्वेक्षण अब एक राष्ट्रीय जनआंदोलन बन गया है। यह केवल सड़कों की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वस्थ, हरित और नागरिकों के अनुकूल शहरों के निर्माण की ओर प्रेरित करता है।
2025 को क्या बनाता है खास?
इस वर्ष स्वच्छ सर्वेक्षण में सुपर स्वच्छ लीग नाम की एक नई श्रेणी जोड़ी गई है। इसमें 2021 से 2023 तक लगातार टॉप 3 में स्थान प्राप्त करने वाले शहरों को शामिल किया गया है। इसे “स्वच्छता का IPL” भी कहा जा सकता है। इंदौर, सूरत और नवी मुंबई जैसे शहर इस लीग में अग्रणी हैं और दूसरों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।
शहरों की श्रेणियाँ: सभी के लिए समान अवसर
बड़े शहरों के सामने छोटे नगरों के प्रदर्शन को बनाए रखने के लिए, सुपर स्वच्छ लीग में शहरों को 5 श्रेणियों में बांटा गया है:
- बहुत छोटे शहर (20,000 से कम जनसंख्या): जैसे पंचगनी
- छोटे शहर (20,000 से 50,000): जैसे वीटा और सासवड
- मध्यम शहर (50,000 से 3 लाख): जैसे तिरुपति और अंबिकापुर
- बड़े शहर (3 से 10 लाख): जैसे नोएडा और चंडीगढ़
- मिलियन–प्लस शहर: जैसे इंदौर और सूरत
हर शहर का मूल्यांकन उसके आकार के अनुसार तय मानकों पर किया जाता है।
सुपर स्वच्छ बनने के लिए क्या चाहिए?
इस लीग में शामिल होने के लिए शहरों को कम से कम 85% स्कोर करना होता है। यह केवल कचरा प्रबंधन नहीं है, बल्कि नवाचार, सतत विकास और नागरिक भागीदारी जैसे मापदंड भी महत्वपूर्ण हैं। इंदौर, जो पिछले 7 वर्षों से भारत का सबसे स्वच्छ शहर रहा है, इसका प्रमुख उदाहरण है।
सिर्फ रैंकिंग नहीं, सोच में बदलाव
स्वच्छ सर्वेक्षण ने शहरों के सोचने और काम करने के तरीके को बदल दिया है। नगरपालिकाएं अब एक–दूसरे से बेहतर प्रदर्शन करने की होड़ में हैं। आम नागरिक भी इस प्रक्रिया में जुड़ चुके हैं—स्कूल के बच्चे दीवारें रंगते हैं, आरडब्ल्यूए कचरा पृथक्करण अभियानों का संचालन करते हैं।
पुरस्कार जो बदलाव को प्रेरित करते हैं
जो शहर अच्छा प्रदर्शन करते हैं उन्हें सरकारी और सार्वजनिक रूप से पुरस्कृत किया जाता है। यह सम्मान शहरों को हर वर्ष बेहतर करने के लिए प्रेरित करता है। छोटे कस्बे भी बड़े शहरों से प्रेरित होकर बेहतर प्रयास कर रहे हैं, यही इस सर्वेक्षण का उद्देश्य था।
स्वच्छ शहर = स्वस्थ भारत
इस सर्वेक्षण का उद्देश्य केवल सुंदरता नहीं, बल्कि बीमारियों में कमी, स्वच्छ पेयजल, और बेहतर शहरी नियोजन भी है। स्वच्छ सर्वेक्षण AMRUT और स्मार्ट सिटी मिशन जैसे कार्यक्रमों से जुड़ा हुआ है जिससे विकास और स्वच्छता एक साथ आगे बढ़ें।
Static GK स्नैपशॉट (प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु)
विषय | तथ्य |
स्वच्छ सर्वेक्षण की शुरुआत | 2016, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा |
सुपर स्वच्छ लीग | 2025 में शुरू की गई |
लगातार स्वच्छतम शहर | इंदौर (7 वर्ष) |
सुपर स्वच्छ लीग के लिए न्यूनतम स्कोर | 85% |
शहर श्रेणियाँ | बहुत छोटे, छोटे, मध्यम, बड़े, मिलियन-प्लस |
निष्कर्ष: एक स्वच्छ भारत, एक शहर एक समय में
स्वच्छ सर्वेक्षण 2025 केवल सफाई की परीक्षा नहीं है—यह शहरी बदलाव का रोडमैप है। यह हमें याद दिलाता है कि स्वच्छता केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। जब देश के हर कोने से शहर इस लक्ष्य की ओर बढ़ते हैं, तब ही भारत एक आदर्श शहरी मॉडल बन सकता है।